दहेज नहीं, सिर्फ बेटी चाहिए—गोविंदसर का विवाह बना मिसाल, पढ़ें न्यूज़

कोलायत। दहेज प्रथा के दबाव और दिखावे की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच गोविंदसर गांव में सम्पन्न हुआ एक विवाह समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। यहां दूल्हे के परिवार ने दहेज लेने से इंकार कर एक सशक्त संदेश दिया है, जिसकी क्षेत्रभर में सराहना हो रही है। गोविंदसर की कन्या विशाखा (सुपौत्री स्व. प्रयागदास) का विवाह मांडा, सोजत निवासी विशेष कुमार (सुपौत्र मनोहरदास), वर्तमान निवासी बेंगलुरु, के साथ वैदिक रीति-विधि से सम्पन्न हुआ। परम्परा के अनुसार कन्या पक्ष ने गहने, नकद राशि और अन्य सामग्री देने की तैयारी कर रखी थी, लेकिन वर पक्ष ने विवाह स्थल पर ही स्पष्ट शब्दों में दहेज लेने से मना कर दिया।

दूल्हे के परिजनों ने कहा—
“हमने केवल बेटी को अपनाने का संकल्प किया है, सामान लेना हमारी परंपरा में नहीं।”उनकी इस सोच ने उपस्थित लोगों के बीच सकारात्मक वातावरण बनाया। दहेज को ठुकराने की इस पहल को समाज में उभरते बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस निर्णय की सराहना नन्दन वन गोशाला के संत सुखदेव, सरपंच संता राम, मांगू सिंह भाटी, अमराराम चादोरा, आशू सिंह (सरपंच बीठंनोख), मूलाराम (लखेसर), ओम लखेश्वर, मूलाराम लखेश्वर (राजस्थान पुलिस), हनुमान लखेश्वर, मगाराम (पंचायत समिति सदस्य), पूर्व वार्ड पंच मूलाराम, पूर्व उपसरपंच किशनलाल कुमावत, सुनील कुमावत (होटल मधुबन बाप), कैलाश, अशोक चांडक सहित अनेक ग्रामीणों ने की। दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ यह कदम समाज में नई सोच और नई दिशा की ओर बढ़ने का संकेत देता है। यह विवाह इस बात का उदाहरण बन गया है कि संस्कार और सरलता दहेज प्रथा को चुनौती दे सकते हैं।