समाजसेवा और सादगी के प्रतीक रहे उम्मेद सिंह जी की स्मृति में उमड़ा जनसैलाब

श्रीकोलायत। क्षेत्र के प्रसिद्ध समाजसेवी, शिक्षाप्रेमी और पूर्व प्रधान दाता श्री उम्मेद सिंह जी खिदांसर की स्मृति में गुरुवार को राजपूत धर्मशाला, कोलायत में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह सभा न केवल एक श्रद्धांजलि समारोह थी, बल्कि एक ऐसे जननायक के प्रति भावपूर्ण नमन था, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन समाजसेवा और जनकल्याण को समर्पित कर दिया।

 

श्रद्धांजलि सभा में कोलायत सहित आसपास के गांवों से भारी संख्या में लोग शामिल हुए। अमर सिंह हाडला (तहसीलदार रि.), भंवर सिंह भेलु (AAO रि.), ठाकुर भीव सिंह गिरासर, हनुमान सिंह नांदंगा, मनोहर सिंह सरपंच सियाणा, मागू सिंह गोविंदसर, ठाकुर घम सिंह नाथूसर, पदम सिंह गोविंदसर, रामेश्वर भुतड़ा सरपंच गनीयाला, सीताराम साध कोलायत, भेरूदान राठी खिदांसर, जोग सिंह भाटी खिदांसर, भगवाना राम सीवर, अमरा राम सीवर खिदांसर, राजूदान रतनू खिदांसर, प्रभु सिंह खीखनिया सहित सैकड़ों ग्रामीणजन व खिदांसर निवासी उपस्थित रहे। सभी ने दाता श्री के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया और दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि दाता उम्मेद सिंह जी का नाम जनसेवा, सरलता और लोकनिष्ठा का पर्याय रहा है। उन्होंने अपने जीवन में सदैव जनहित को सर्वोपरि रखा। शिक्षा, सामाजिक उत्थान, ग्रामीण विकास और सांस्कृतिक जागरण के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय है। वे राजनीति और समाजसेवा, दोनों क्षेत्रों में समान रूप से आदरणीय रहे।

सभा में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए गिरधरदान रतनू दासोड़ी ने कहा कि दाता उम्मेद सिंह जी भाषा और व्यंग्य कला के मर्मज्ञ थे। उनका भाषण शैली, शब्द चयन और भावनात्मक प्रस्तुति उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती थी। रतनू ने स्मरण किया कि उम्मेद सिंह जी का हर भाषण जनता के हृदय को छू जाता था और उसमें समाज के लिए संदेश छिपा होता था।

उन्होंने एक रोचक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि एक बार हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल कोलायत की एक सभा में बोले थे—

“ये देवीसिंह कोलायत का गुंडा होगा, लेकिन वो जानता नहीं कि मैं भारत का गुंडा हूँ।”

इस पर दाता श्री ने अपने व्यंग्यपूर्ण और तेजस्वी वक्तव्य से कहा—

“हम तो आज तक अंधेरे में थे, भजनलालजी को राष्ट्रीय नेता मानते थे, पर अब पता चला कि वे भारत स्तर के गुंडा हैं।”

इस कथन पर सभा ठहाकों से गूंज उठी और भजनलालजी भी मुस्कुरा दिए। यह घटना दाता श्री की अद्भुत बुद्धिमत्ता और व्यंग्य की गहराई का प्रतीक रही।

सभा में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने कहा कि दाता उम्मेद सिंह जी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित किया कि समाजसेवा केवल पद या शक्ति से नहीं, बल्कि निष्ठा और समर्पण से की जाती है। वे जनहित के लिए हमेशा तत्पर रहते थे और उनकी विनम्रता ही उन्हें सबके हृदय के करीब ले गई।

श्रद्धांजलि सभा के सफल आयोजन में समाजसेवी प्रभात सिंह भाटी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि यह आयोजन दाता श्री के प्रति पूरे क्षेत्र की श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे दाता श्री के दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में एकता, सहिष्णुता और सेवा की भावना को आगे बढ़ाएँ।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में कहा कि दाता उम्मेद सिंह जी जैसे जननायक समाज में सदैव अमर रहेंगे। सभा का समापन “दाता अमर रहें — जनसेवा अमर रहे” के जयघोष के साथ हुआ और पूरा परिसर श्रद्धा और भावनाओं से गूंज उठा।