श्री कोलायत, बीकानेर। राजकीय महाविद्यालय कोलायत एवं राजकीय कन्या महाविद्यालय कोलायत में आज दिनांक 04 अगस्त 2025 को नीति से परिवर्तन तक: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पांच वर्ष विषय पर प्रेरक व्याख्यानों का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान उच्च शिक्षा की स्थानीय इकाइयों द्वारा आयोजित ‘नीति से परिवर्तन तक’विषय पर केंद्रित था। जिसमें उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गत पांच वर्षों में हुए महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों, नीतिगत अनुभवों एवं भावी संभावनाओं पर सार्थक चर्चा की गई व्याख्यानमाला के मुख्य वक्ता डूंगर महाविद्यालय बीकानेर के पूर्व प्राचार्य एवं संगठन के पश्चिम प्रांत के संयोजक आचार्य दिग्विजय सिंह रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आचार्य दिग्विजय सिंह ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह शिक्षा नीति एक दीर्घकालिक नीति है जिसमें क्रमबद्ध तरीके से राष्ट्रहित के लिए विद्यार्थियों को तैयार किया जाएगा। कौशल संपन्न विद्यार्थी भारतीय परम्परा के ज्ञान से युक्त होकर तथा अंतरराष्ट्रीय ज्ञान को प्राप्त कर भारत का विश्व स्तर पर प्रतिष्ठापन करेंगे। साथ ही मुख्य वक्ता डॉ दिग्विजय सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति का 66 पेज का डॉक्यूमेंट प्रत्येक विद्यार्थी को पढ़ना चाहिए एवं इस नीति की बारीकियां को समझना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति एकेडमिक बैंक का क्रेडिट के अंतर्गत विद्यार्थी के शैक्षिक उन्नयन के प्रत्येक चरण को उपलब्धि के रूप में दर्ज करने की व्यवस्था करती है। मल्टीपल एंट्री एग्जिट के अंतर्गत स्नातक स्तर के 4 वर्षों में से प्रत्येक वर्ष की उपलब्धि को स्वीकार करती है। यह व्यवस्था महिलाओं के ड्रॉपआउट को देखते हुए उनकी उच्च शिक्षा को सुनिश्चित करने वाली है। राजकीय कन्या महाविद्यालय कोलायत मे कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आचार्य उज्जवल गोस्वामी,प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, महारानी सुदर्शन राजकीय कन्या महाविद्यालय बीकानेर रहें। गोस्वामी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र गौरव होना चाहिए, विद्यार्थी तथा शिक्षक केंद्रित होना चाहिए और राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति करती हुई दिखाई देती है। प्राचार्य डॉ मुकेश सियाग ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा में भारतीयता लाने एवं साथ ही 21वीं शताब्दी की चुनौतियां का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में आचार्य शशिकांत जी की ऊर्जावान उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का संचालन इकाई सचिव डॉ सूरज प्रकाश ने किया। इस अवसर पर संकाय सदस्य डॉ अर्चना, डॉ बिंदु चंद्राणी, श्री इंद्र पाल, श्रीमती उर्मिला आदि समस्त संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।