बीकानेर। रामलीला यानी हम अपनी सनातनी संस्कृति को रूपक दृश्य में चित्रित देख मन आह्लादित एक बालक की तरह हो उठता है। उन कलाकारों द्वारा अभिनीत पात्रों के प्रति भले ही क्षणिक ही सही एक बार आस्था ढल जाती है।
श्री नव दुर्गा राम लीला कमेटी, बीकानेर द्वारा पहली बार “जोशी बगेची, उस्ता बारी के बाहर, बीकानेर” अपना आयोजन कर रहा है तथा कुल मिलाकर राम लीला आयोजन का तृतीय वर्ष में प्रवेश किया है इस हेतु राम लीला आयोजक ललित जोशी, लक्ष्मीकान्त जोशी, मोहित जोशी सहित अनेक पदाधिकारियों को साधुवाद।
यह आयोजन भले ही अपने शैशव काल में है तथा अपने समिति संसाधनों द्वारा बहुत कुशलता पूर्वक किया जा रहा है जो सराहनीय है। पहले दिन के बनिस्पत द्वितीय दिवस दर्शकों की संख्या में वृद्धि थीं जो रसिकों का आकर्षण दर्शाता है। कल दूसरे दिन की प्रस्तुति में “दशरथ पुत्रों का जन्म,” “माँ सीता का जन्म “, “श्रीराम – लक्ष्मण को शिक्षा हेतु महऋषि विश्वामित्र के आश्रम प्रस्थान तथा ताड़का वध सहित अन्य प्रसंग चरितार्थ किये गए।रामलीला में कल की प्रस्तुति में दशरथ (पंकज भादाणी), मारीच (वशु जोशी), विश्वामित्र (यश व्यास ), ताड़का (मोहित गज्जाणी ) सहित सभी कलाकारों अपना सजीव अभिनय किया। रामलीला नित्य रात्रि 8:30 बजे से 11:00 बजे तक मन हर्षित झांकियों का प्रदर्शन होता हैं तथा आज श्रीराम – माँ सीता विवाह के प्रसंग सहित अनेक पौराणिक प्रसंगों का चित्राँकन होगा।