नई दिल्ली। ऑनलाइन गेमिंग (संवर्धन एवं नियमन) विधेयक 2025 को गुरुवार को राज्य सभा ने विपक्ष के भारी शोर-शराबे के बीच पारित कर दिया। इसके साथ ही इस पर संसद के दोनों सदनों की मुहर लग गयी है। लोक सभा ने इस विधेयक को बुधवार को इसी तरह हंगामे के बीच बिना बहस के पारित कर दिया था।
राज्य सभा में पहले स्थगन के बाद अपराह्न दो बजे कार्यवाही पुन: शुरू हुयी थी। विपक्षी दलों के सदस्यों और हंगामे के बीच ही उप सभापति हरिवंश की अनुमति से इलेक्ट्रानिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विधेयक के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए रखा। सदन ने विधेयक को सदन की प्रवर समिति के समक्ष भेजने, और इसके कुछ उपबंधों में संशोधन के कुछ विपक्षी सदस्यों के प्रस्तावों को नामंजूर करते हुए इसे बिना बहस के ध्वनिमत से पारित कर दिया।
इस बीच नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीठ से शिकायत की कि विपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता है। इसके बाद वह मतदाता सूची के मुद्दे पर बोलने का प्रयास करने लगे तो हरिवंश ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी। उप सभापति ने कहा कि विधेयक पर चर्चा हो रही हो तो कोई और बात रिकार्ड में नहीं जाएगी। संसदीय कार्यमंत्री ने पीठ की अनुमति से बोलते हुए श्री खरके की बात पर आपत्ति जतायी और कहा, “पीठ पर प्रश्न उठाना ठीक नहीं है। विपक्ष के नेता विषय पर तो बोलते नहीं है और पीठ पर सवाल उठाने लगते हैं। विपक्ष ने पूरे मानूसन सत्र में कार्यवाही चलाने में सहयोग नहीं।”
उपसभापति ने सदन में तख्ती लेकर आने के विपक्षी सदस्यों के आचरण पर खेद जताते हुए कहा कि तख्ती लाना सदन की परंपरा के विपरीत है। इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने संविधान (130वां) संशोधन विधेयक और उसके साथ लोक सभा में प्रस्तुत दो विधेयकों की समीक्षा कर उस पर सिफारिश के लिए लोक सभा द्वारा प्रस्तावित संयुक्त समिति में शामिल होने और इसके लिए राज्य सभा के दस सदस्यों को उप सभापति द्वारा नामित किये जाने के प्रस्ताव को रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। ऑनलाइन गेमिंग विधेयक को मंजूरी मिलने के साथ ही उप सभापति ने सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित कर दी।