श्रीकोलायत, बीकानेर। उपखंड क्षेत्र के मढ कोटड़ी गांव के समीप स्थित ऐतिहासिक जागेरी तालाब आज अस्तित्व संकट से जूझ रहा है। वर्षों पुराना यह तालाब, जो कभी ग्रामीणों के लिए जलस्रोत और सौंदर्य का प्रतीक था, आज गंदगी, कमल बेलों और अनियंत्रित अवैध खनन के कारण बदहाली की तस्वीर बन चुका है।
तालाब की पायतन भूमि में हो रहे अवैध खनन से जल आवक का रास्ता अवरुद्ध हो गया है, जिससे मानसून के दौरान भी तालाब में जलभराव नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप, तालाब की प्राकृतिक संरचना धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पहले यहां सालभर पानी रहता था, लेकिन अब तालाब की तली में सिर्फ काई, कीचड़ और कमल बेलों का अतिक्रमण दिखाई देता है।
स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि:
तालाब की तत्काल सफाई करवाई जाए,
कमल बेल व अन्य वनस्पतियों को हटाया जाए,
पायतन में हो रहे अवैध खनन को पूरी तरह रोका जाए,
तालाब की जल आवक व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए,
और इसे संरक्षण की दृष्टि से पंचायत व जल संसाधन विभाग की प्राथमिकता में लाया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह ऐतिहासिक तालाब पूरी तरह खत्म हो जाएगा, जिससे न केवल ग्रामीणों की पेयजल और पेड़ो की सिंचाई की समस्याएं बढ़ेंगी, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
प्राकृतिक जल स्त्रोतों की रक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जागेरी तालाब को बचाने के लिए जन सहयोग और प्रशासनिक संकल्प की जरूरत है। – दलीप सिंह राजपुरोहित एडवोकेट श्री कोलायत