पैदल चलने वालों की सुरक्षा पर चार हफ्ते में दिशानिर्देश तैयार करें केंद्र : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पैदल चलने वालों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए बाधा रहित फुटपाथ संबंधी दिशानिर्देश तैयार करने का शुक्रवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने पैदल चलने वालों की सुरक्षा से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए यह भी कहा कि अगर केंद्र सरकार दिशानिर्देश बनाने में विफल रही तो यह अदालत अधिवक्ता की सहायता से आवश्यक कार्रवाई करेगी।इस पर केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार इस संबंध में दिशानिर्देश तैयार करेगी।

पीठ ने कहा, “यह बताया गया है कि नागरिकों के उपयोग के लिए उचित फुटपाथ होना ज़रूरी है। फुटपाथ ऐसे होने चाहिए जो दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ और उपयोग योग्य हों और फुटपाथों पर अतिक्रमण हटाना अनिवार्य है।” पीठ के समक्ष न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने दलील दी कि केंद्र सरकार द्वारा दिशानिर्देश अभी तक नहीं बनाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने सड़क सुरक्षा से संबंधित विभिन्न आदेशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए पूर्व उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। उन्होंने ने कहा कि दिशानिर्देश तैयार होने के बाद, समिति पैदल यात्रियों की मौतों को रोकने के लिए उनके कार्यान्वयन की निगरानी शुरू कर सकती है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार इस संबंध में दिशानिर्देश तैयार करेगी।

शीर्ष न्यायालय ने गत 14 मई को कहा था कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। फुटपाथों का अभाव खतरनाक है क्योंकि इससे कई दुर्घटनाएँ होती हैं। अदालत ने यह जानना चाहा कि राज्य और स्थानीय प्राधिकरण पैदल यात्रियों के इस मौलिक अधिकार की रक्षा कैसे करेंगे कि फुटपाथ बिना किसी बाधा के उचित स्थिति में हों। इसके बाद न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पैदल यात्रियों के लिए उचित फुटपाथ सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि फुटपाथों का अभाव खतरा पैदा करता है, जिससे कई दुर्घटनाएँ होती हैं। अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जब पैदल यात्रियों को सड़कों पर चलने के लिए मजबूर किया जाता है तो वे जोखिम के प्रति संवेदनशील होते हैं। पीठ ने कहा, “नागरिकों के लिए उचित फुटपाथ होना ज़रूरी है। ये फुटपाथ ऐसे होने चाहिए कि दिव्यांगजन भी इनका उपयोग कर सकें। इसके लिए फुटपाथ से अतिक्रमण हटाना अनिवार्य है।”

इस न्यायालय ने माना है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत पैदल यात्रियों को फुटपाथ का उपयोग करने का अधिकार प्राप्त है। पीठ ने केंद्र को पैदल यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित नीतियों और दिशानिर्देशों को रिकॉर्ड में रखने का भी निर्देश दिया था। पीठ ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए एक याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उचित फुटपाथों की कमी और पैदल मार्गों पर अतिक्रमण पर जोरदिया गया था।

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