श्रीकोलायत। गर्भवती महिलाओं में बढ़ते रक्ताल्पता (एनीमिया) के प्रभावी प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार के उद्देश्य से कोलायत ब्लॉक में पिंक पखवाड़ा (17 से 30 नवम्बर ) के अंतर्गत फेरिक कार्बाॅक्सी माल्टोज इंजेक्शन के उपयोग पर जिला एवं ब्लॉक स्तरीय संयुक्त कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम उपखण्ड मुख्यालय के स्थानीय ब्लॉक कार्यालय सभागार में सम्पन्न हुआ, जिसमें जिले और ब्लॉक स्तर के चिकित्सा अधिकारियों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक जॉन बीकानेर डॉ. देवेंद्र चौधरी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुखराज साध तथा खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील जैन उपस्थित रहे। अधिकारियों ने गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की गंभीर स्थिति को देखते हुए एफ.सी.एम. इंजेक्शन की विधि, मात्रा, सुरक्षा, हीमोग्लोबिन परीक्षण, अनुसरण (फॉलो-अप) और जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया। पिंक पखवाड़ा अवधि में प्रत्येक गर्भवती महिला का हीमोग्लोबिन परीक्षण अनिवार्य रूप से कराने और जिनका स्तर कम मिले, उन्हें प्राथमिकता से एफ.सी.एम. देने के निर्देश भी दिए गए।
इसी दौरान ब्लॉक स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई जिसमें एलिजिबल कपल सर्वे की धीमी प्रगति पर अधिकारियों ने नाराजगी व्यक्त की। संयुक्त निदेशक व सीएमएचओ ने कहा कि परिवार कल्याण और जनसंख्या स्थिरीकरण से जुड़े इस महत्वपूर्ण सर्वे को समय पर पूरा नहीं किया जाना चिंताजनक है। अधिकारियों ने स्वास्थ्य कर्मियों को तुरंत सर्वे गति बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में राज्य सरकार द्वारा संचालित टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण कार्यक्रम, मौसमी बीमारियों की रोकथाम, दवा वितरण, प्राथमिक उपचार सेवाओं सहित सभी योजनाओं की धरातलीय समीक्षा की गई। अधिकारियों ने कहा कि प्रत्येक स्वास्थ्य उपकेन्द्र और कार्यकर्ता को अपने क्षेत्र में नियमित निगरानी रखनी होगी, ताकि किसी भी प्रकार की कमी न रहे।
बैठक समाप्ति के बाद संयुक्त निदेशक और सीएमएचओ ने गडियाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। यहां संस्थान कार्मिकों द्वारा ग्रामीणों को उपलब्ध करवाई जा रही चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता परख की गई। मौसमी बीमारियों में बढ़ोतरी को देखते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए और मरीजों को समय पर तथा गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध करवाने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों ने कहा कि पिंक पखवाड़ा, एनीमिया मुक्त राजस्थान और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रम तभी सफल होंगे जब स्वास्थ्य कर्मी टीम भावना से समयबद्ध तरीके से कार्य करें। जिले की हर गर्भवती महिला, नवजात व ग्रामीण परिवार तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।