श्रीकोलायत। उपखण्ड का रेलवे अंडर ब्रिज अब आमजन के लिए अभिशाप बन चुका है। जिस पुलिया को सुविधा के रूप में बनाया गया था, वह आज अव्यवस्था, लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन गई है। स्थिति यह है कि इस मार्ग से रोजाना सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, लेकिन वर्षों से सफाई नहीं होने के कारण अंडर ब्रिज धूल, मिट्टी और गंदगी का ढेर बन चुका है। पूरे क्षेत्र में दिनभर उड़ते धूल के गुब्बारों से लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। झझू चौराहे से लेकर कस्बे के अंदर तक हवा में धूल तैरती रहती है। दुकानदारों की मिठाइयाँ, नमकीन और खाद्य सामग्री पर धूल की मोटी परत जम जाती है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। लोग खांसी, जुकाम और दम जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन है।
सबसे गंभीर समस्या अंडर ब्रिज पर बने हाईट गेज की है। पंचायत समिति की ओर इसका स्तर इतना ऊँचा और खतरनाक है कि नीचे जमी मिट्टी के कारण आए दिन बसें और ट्रक टकरा जाते हैं। कई वाहन क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और कई बार तो यात्रियों से भरी बसों को रोककर चालक जान बचाने को मजबूर हो गए हैं।
यह हादसा होने का इंतजार कर रहा एक खतरनाक जाल है, जिसकी जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं। भारी वाहनों के फंस जाने से अंडर ब्रिज पर बार-बार जाम लग जाता है। माल से लदे ट्रक और ट्रैक्टर ढलान पर चढ़ नहीं पाते और फिर पीछे लुढ़क जाते हैं, जिससे बड़े हादसों की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर स्थिति की गंभीरता से अवगत करवाया है और कहा है कि यह अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक आपदा बन चुकी है। लोगों का कहना है कि अंडर ब्रिज के नीचे मिट्टी की परत हटाने और नियमित सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। प्रशासन की लापरवाही से कोलायत का सबसे व्यस्त मार्ग मौत का मोड़ बन गया है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि सरकार विकास की बात करती है, लेकिन कोलायत का अंडर ब्रिज लोगों के जीवन को संकट में डाल रहा है। यह शर्म की बात है कि कपिल मुनि मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के निकट आने पर भी अधिकारी इस समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं। इधर, एसडीएम ने मेले को देखते हुए ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय पुलिस, परिवहन विभाग और माइनिंग विभाग को चेताया गया है कि मुख्यालय से ओवरलोड वाहन निकलते ही चालक पर बड़ा जुर्माना लगाया जाएगा। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि केवल आदेशों से काम नहीं चलेगा — जब तक अंडर ब्रिज की सफाई, मरम्मत और हाईट गेज का स्थान परिवर्तन नहीं किया जाता, तब तक यह समस्या जस की तस बनी रहेगी। जनता का स्पष्ट कहना है कि “कोलायत की सड़कों पर अब चलना खतरे से खाली नहीं, धूल में सांस लेना भी सजा बन गया है।” अब जरूरत है कि उपखंड प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे, नहीं तो यह अंडर ब्रिज किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।