बीकानेर। ज़िले के छोटे से गाँव झझू ने एक ऐसे सपूत को जन्म दिया है जिसने अपने संघर्ष और मेहनत से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया। साधारण परिवार से निकलकर अपनी लगन, मेहनत और निष्ठा के बल पर चार्टर्ड अकाउंटेंट पिंटू सेठिया ने यह साबित किया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता दूर नहीं रहती।
राजकीय विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले पिंटू सेठिया ने हिंदी माध्यम से पढ़ाई की, लेकिन अंग्रेज़ी माध्यम में कठिन चार्टर्ड अकाउंटेंसी की परीक्षा पास कर झझू के पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट बने। उन्होंने जीवन के हर चरण में संघर्ष को साथी बनाया और कभी हार नहीं मानी। आज वे पुणे की देश की नामी वाहन निर्माण करने वाली कंपनी मदरसन समूह – एस.एम.आर.सी. कंपनी में वित्त विभाग प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं।
हाल ही में पुणे के होटल ताज विवांता में आयोजित “ग्यारहवां नई पीढ़ी वित्त प्रमुख सम्मेलन और पुरस्कार 2025” में उन्हें “वर्ष 2025 के युवा और प्रेरणादायक वित्त नेता” के सम्मान से नवाज़ा गया। यह सम्मान गेन्स व्यवसाय मीडिया, मुंबई की ओर से प्रदान किया गया। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे झझू और बीकानेर जिले के लिए गर्व का विषय है।
पिंटू सेठिया का जीवन सादगी, संघर्ष और सेवा की मिसाल है। वे हमेशा से सरल जीवन अपनाने वाले व्यक्ति रहे हैं। स्कूल और कॉलेज के दिनों में साइकिल से पढ़ने जाते थे। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने अंग्रेज़ी माध्यम में चार्टर्ड अकाउंटेंसी की कठिन परीक्षा पास कर यह सिद्ध किया कि मेहनत और आत्मविश्वास के आगे भाषा की कोई बाधा नहीं होती। जीवन के उतार-चढ़ावों का सामना करते हुए उन्होंने खुद को मजबूत बनाया और कभी पीछे नहीं हटे।

वे केवल एक सफल व्यवसायिक जीवन जीने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि समाजसेवा में भी अग्रणी हैं। अब तक 25 से अधिक बार कैंसर पीड़ित बच्चों को प्लेटलेट और प्लाज़्मा का दान कर चुके हैं। स्वयं मुंबई जाकर टाटा स्मारक चिकित्सालय में यह दान करते हैं ताकि ज़रूरतमंद बच्चों को नया जीवन मिल सके। उनका मानना है — “जीवन में किसी के काम आना ही जीवन का सच्चा अर्थ है।”
पिंटू सेठिया अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार, गुरुजनों और शुभचिंतकों को देते हैं। उनके अनुसार माता-पिता, प्रिय गुरु किशनराम, स्वर्गीय रामचंद्र, बड़े भाई विजय सेठिया, पत्नी पूनम सेठिया, नरेंद्र भाई सेठिया, जीजा पूनमचंद बोथरा और मेघराज बाबोसा सेठिया परिवार का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इन सबके आशीर्वाद और सहयोग से ही वे आज इस ऊँचाई तक पहुँचे हैं।
स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित होकर वे हमेशा यह संदेश देते हैं — “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंज़िल न मिल जाए।” यही विचार उनके जीवन की दिशा और प्रेरणा बने हुए हैं।
पिंटू सेठिया की यह कहानी आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है कि संघर्ष ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, अगर हिम्मत और विश्वास साथ हो तो मंज़िल अवश्य मिलती है। उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि सच्चा संघर्ष ही जीवन की असली पहचान है।