कृष्ण विवाह, सुदामा चरित्र और दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वाचन, शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब
कोलायत। आध्यात्मिक वातावरण से ओतप्रोत धर्मनगरी कोलायत में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का सप्तम दिवस अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। भक्तों की भारी उपस्थिति के बीच पंडाल में भक्ति रस निरंतर धारा की तरह बहता रहा।
आज के प्रमुख प्रसंगों में भगवान श्रीकृष्ण विवाह, सुदामा चरित्र, कृष्ण–लीलाएँ तथा लोक कल्याणकारी उपदेशों का विस्तृत व प्रवाहपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु आध्यात्मिक आनंद से अभिभूत हो उठे।
पंडित रामदेव जी शास्त्री के मधुर वचनों में छिपा जीवन का मार्गदर्शन
कथा वाचक पंडित रामदेव जी शास्त्री ने सरल परंतु प्रभावी शैली में बताया कि कलयुग में केवल भक्ति ही वह दिव्य मार्ग है, जिसके सहारे मानव जीवन के दुखों, भ्रमों और क्लेशों से मुक्ति पाकर प्रभु की शरण में पहुँचा जा सकता है।
उन्होंने कहा, “जिस हृदय में भक्ति जगती है, वही हृदय वास्तव में शुभ कर्मों के लिए तैयार होता है।”
कृष्ण विवाह और सुदामा चरित्र ने किया भाव-विभोर
कथा में आज भगवान श्रीकृष्ण के भव्य विवाह की दिव्य झांकी प्रस्तुत की गई। विवाह प्रसंग के वर्णन के दौरान पंडाल तालियों और जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इसके बाद सुदामा चरित्र का वर्णन सुनते ही श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं। मित्रता, सादगी और प्रेम से ओतप्रोत इस प्रसंग ने सबके हृदय को गहराई से छू लिया।
संगीत की सुरमयी प्रस्तुति ने बढ़ाया कथा का मनोरम वातावरण
संगीतकार राधेश्याम मारवाड़ी के नेतृत्व में प्रस्तुत भक्तिमय भजनों ने पंडाल में अलौकिक भावनाओं का संचार किया। ढोलक, हारमोनियम और मृदंग की तालों पर जब भजन गूंजे, तो पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया।
पूजा-अर्चना और शोभायात्रा ने बढ़ाया कार्यक्रम का वैभव
पूजा एवं अनुष्ठान संबंधी सभी कार्य पंडित बनवारी शास्त्री और रामदेव कल्ला द्वारा विधि-विधान से संपन्न किए गए।
दिवस का मुख्य आकर्षण आज निकाली गई भागवत की भव्य शोभायात्रा रही, जिसमें रंग-बिरंगी झांकियों, भजन मंडलियों और उत्साहित श्रद्धालुओं की लंबी कतारों ने नगर के मार्गों को भक्तिमय बना दिया।
बिस्सा परिवार ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
पूरे आयोजन में बिस्सा परिवार की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही। परिवार के सदस्यों ने निरंतर सेवा, सहयोग और समर्पण भाव से कथा की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित कीं।
सप्तम दिवस की कथा में श्रद्धालुओं की उपस्थिति यह बताती है कि कोलायत की पवित्र धरा में भागवत भक्ति की परंपरा कितनी गहरी और जीवंत है। आयोजकों ने आगामी दिवसों में भी अधिक से अधिक भक्तों से उपस्थित होकर कथा का आनंद लेने का आग्रह किया।