नौगाम थाने में विस्फोट, नौ की मौत, 32 घायल: डीजीपी

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने शनिवार को कहा कि नौगाम थाने में विस्फोट एक आकस्मिक घटना है, जिसमें नौ लोग मारे गए और 32 घायल हुए हैं। उन्होंने इस घटना में किसी भी आतंकी पहलू से इनकार किया है।

प्रभात ने कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारणों की जांच की जा रही है। उन्होंने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि नौगाम थाना में दर्ज एक प्राथमिकी की जांच के दौरान नौ और 10 नवंबर को हरियाणा के फरीदाबाद से भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ, रसायन और अभिकर्मक भी बरामद किए गए थे।

डीजीपी ने कहा, “इन्हें अन्य बरामद सामग्रियों की तरह, नौगाम थाने के खुले क्षेत्र में सुरक्षित रूप से ले जायी गयी और रखी गयी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत, बरामदगी के नमूनों को फोरेंसिक और रासायनिक जांच के लिए भेजा जाना था।”

उन्होंने कहा कि बरामदगी की विशाल प्रकृति के कारण यह प्रक्रिया पिछले दो दिनों यानी कल और परसों फोरेंसिक टीम द्वारा चलायी जा रही थी। उन्होंने कहा, “बरामदगी और नमूना लेने की प्रक्रिया की अस्थिर और संवेदनशील प्रकृति के कारण एफएसएल टीम द्वारा अत्यंत सावधानी के साथ काम किया जा रहा था। हालांकि, दुर्भाग्यवश इस दौरान कल रात लगभग 11.20 बजे एक आकस्मिक विस्फोट हुआ। इस घटना के कारण के बारे में कोई अन्य अटकलें लगाना अनावश्यक है।”

उन्होंने कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में नौ लोगों की जान चली गई है। मारे गए लोगों में राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) का एक कर्मी, एफएसएल के तीन कर्मी, जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा के दो फ़ोटोग्राफ़र, मजिस्ट्रेट की टीम में शामिल दो राजस्व अधिकारी और टीम से जुड़ा एक दर्जी शामिल हैं।

प्रभात ने कहा, “इसके अलावा 27 पुलिसकर्मी, दो राजस्व अधिकारी और आस-पास के इलाकों के तीन नागरिक घायल हुए हैं।” उन्होंने कहा कि घायलों को तुरंत नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

डीजीपी ने कहा, “ थाने की इमारत को बहुत नुकसान पहुंचा है। साथ ही आस-पास की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। इस नुकसान की सीमा का पता लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारणों की जांच की जा रही है। नौगाम थाना की पुलिस ने पिछले महीने जैश-ए-मोहम्मद के धमकी भरे पोस्टरों से संबंधित एफआईआर संख्या 162, दर्ज की थी। इस जांच से अंततः दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए विस्फोट मामले से जुड़े एक बड़े अंतरराज्यीय आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ। जांच के दौरान बरामद विस्फोटकों को थाने में रखा गया था। जैश के पोस्टरों के मामले की जांच अब जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष जांच एजेंसी (एसआईए) कर रही है।