नई दिल्ली। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (बीयूवीएम) ने केंद्र सरकार से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) केवल तीन स्लैब में निर्धारित करने की अपील की है।
बीयूवीएम के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, “सरकार व्यवसाय करने में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ावा दे रही है लेकिन जीएसटी की अनेक दरें सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और व्यापारियों के लिए बड़ी चुनौती हैं। हमने सरकार को सुझाव दिया है कि जीएसटी दरों को केवल तीन स्लैब शून्य प्रतिशत, पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत में रखा जाए। अगर इसे लागू किया गया तो यह सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।”
उन्होंने कहा कि सभी खाद्य उत्पादों पर चाहे उनका वजन या पैकिंग कुछ भी हो उन पर जीएसटी दर शून्य प्रतिशत होना चाहिए। खाद्यान्न, दालें, तिलहन के लिए क्लीनिंग, ग्रेडिंग और सॉर्टिंग मशीनें, एलईडी लैंप, सबमर्सिबल पंप, हार्डवेयर, स्टेनलेस स्टील, 1,000 रुपये तक के खिलौने, खाद्य तेल, बेकरी उत्पाद, सौर जल हीटर, घी, अचार, हस्तशिल्प और 1,000 रुपये प्रतिदिन तक के होटल रूम को पांच प्रतिशत स्लैब में रखा जाना चाहिए। शेष सभी उत्पाद 18 प्रतिशत के स्लैब में रखना चाहिए।उन्होंने कहा कि राज्यों में मंडी सेस की दरों में व्यापक असमानता ह जो 0-4 प्रतिशत के बीच होती है, इसे एक समान किया जाना चाहिए।
बीयूवीएम के वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव मुकुंद मिश्रा कहा, “सभी राज्यों में कृषि मंडी सेस को 100 रुपये पर 50 पैसे किया जाना चाहिए। इससे सभी किसानों और व्यापारियों को बराबरी का अवसर मिलेगा और ‘वन नेशन, वन मार्केट’ की दिशा में सार्थक कदम होगा। साथ ही यह राज्य सरकारों की आय को भी बढ़ाएगा।” भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, दिल्ली के अध्यक्ष प्रेम अरोड़ा ने कहा: ” मौजूदा समय में एफएसएसएआई नियमों के तहत हर छह महीने में खाद्य सैंपल टेस्टिंग जरूरी है। यह छोटे व्यवसायों के लिए भारी वित्तीय बोझ बन गया है। हम मांग करते हैं कि यह प्रक्रिया केवल वर्ष में एक बार होनी चाहिए।”
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, दिल्ली के वरिष्ठ महासचिव हेमंत गुप्ता ने ई-कॉमर्स की अनियमित वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “हम ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत के विज़न का समर्थन करते हैं लेकिन ई-कॉमर्स का विकास संतुलित होना चाहिए। छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए एक रेगुलेटर नियुक्त किया जाना चाहिए जैसे बैंकों और बीमा के लिए होता है। साथ ही एमआरपी से कम कीमत पर कोई भी उत्पाद नहीं बेचा जाना चाहिए। इससे पारंपरिक व्यापारियों के हित सुरक्षित रहेंगे।”
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, दिल्ली के सचिव राकेश यादव ने कहा, “एमएसएमई के वर्गीकरण में व्यापार की प्रकृति के अनुसार संशोधन किया जाना चाहिए। सरकार द्वारा टर्नओवर के आधार पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी व्यावहारिक बनाया जाए ताकि एमएसएमई को लाभ मिल सके।” भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने टीडीएस और टीएससी जैसे प्रावधानों को तत्काल हटाने की भी मांग की और कहा कि यह व्यापारियों पर अनुपालन का अनावश्यक बोझ डालते हैं।