छात्रों में जागृत हुई जनजातीय इतिहास और विरासत के प्रति नई समझ
श्री कोलायत। राजकीय महाविद्यालय कोलायत में शुक्रवार को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती “जनजाति गौरव दिवस” के रूप में अत्यंत गरिमामय और उत्साहपूर्ण माहौल में मनाई गई। महाविद्यालय परिसर सुबह से ही कार्यक्रमों की तैयारियों से गुलजार रहा। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इस विशेष अवसर को जनजातीय समाज के इतिहास, विरासत और उनकी सांस्कृतिक महत्ता को समझने और सम्मान देने के रूप में मनाया।
निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिता से शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत “जनजाति समाज—भारतीय सामाजिक व्यवस्था का अभिन्न अंग” विषय पर निबंध और चित्रकला प्रतियोगिता से हुई। इन प्रतियोगिताओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की। निबंध प्रतियोगिता में छात्रों ने जनजातीय समाज की परंपराओं, संघर्षों और समकालीन भारतीय समाज में उनके योगदान को अपने शब्दों में अभिव्यक्त किया। चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने जनजातीय संस्कृति, प्रतीकों और भगवान बिरसा मुंडा के संघर्षों को रंगों के माध्यम से प्रभावी रूप में दर्शाया। महाविद्यालय के शिक्षकों ने प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की।
व्याख्यान में बिरसा मुंडा के जीवन संघर्षों पर विस्तृत प्रकाश
प्रतियोगिताओं के बाद आयोजित विशेष व्याख्यान कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सहायक आचार्य इंद्रपाल बिश्नोई ने भगवान बिरसा मुंडा के सामाजिक योगदान और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि वे आदिवासी समाज के ऐसे जननायक थे जिन्होंने अंग्रेजी शासन के अत्याचारों के विरुद्ध जनविद्रोह की अगुआई की। उन्होंने मुंडा समुदाय में सामाजिक सुधार आंदोलन चलाते हुए उन्हें एकजुट किया और “उलगुलान” जैसे ऐतिहासिक आंदोलन को जन्म दिया। बिश्नोई ने विद्यार्थियों से कहा कि आज के समय में भी बिरसा मुंडा के विचार सामाजिक न्याय, समरसता और संघर्षशीलता के लिए प्रेरणा देते हैं।
प्राचार्य ने विद्यार्थियों को दिए प्रेरक संदेश
महाविद्यालय के प्राचार्य मुकेश सियाग ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के ऐसे योद्धा थे, जिनका योगदान इतिहास के स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, साहस और दृढ़ निश्चय ही बिरसा मुंडा के जीवन की प्रमुख विशेषताएं थीं। युवाओं को उनके जीवन से सीख लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा प्राप्त करनी चाहिए।
सुंदर संचालन और सफल आयोजन कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम प्रभारी नारायणी ने सौम्यता और दक्षता के साथ किया। उन्होंने सभी आगंतुकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि ऐसे अवसर विद्यार्थियों में सांस्कृतिक जागरूकता और ऐतिहासिक समझ को बढ़ाते हैं।
महाविद्यालय परिवार की व्यापक सहभागिता कार्यक्रम में डॉ. सूरज प्रकाश, बिंदु चंद्रानी, ऊर्मिला, प्रभु दयाल, युवक कुमार सहित महाविद्यालय परिवार के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
प्रतिभागियों को मिला सम्मान अंत में निबंध और चित्रकला प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय परिसर में उत्साह और संतोष का वातावरण दिखाई दिया।
इस आयोजन ने विद्यार्थियों में आदिवासी समाज की गौरवशाली परंपराओं और भगवान बिरसा मुंडा के ऐतिहासिक महत्व के प्रति नई समझ और सम्मान को जन्म दिया।