शोभासर माइनर क्षेत्र के किसानों ने जताई गहरी चिंता, कहा— विभाग का यह प्रयोग फसलों के लिए घातक साबित होगा
नाल। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अंतर्गत आने वाले शोभासर माइनर क्षेत्र के किसानों में इन दिनों गहरी बेचैनी और आक्रोश व्याप्त है। किसानों ने सिचाई व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए मुख्य कार्यकारी अभियंता, इंदिरा गांधी नहर परियोजना, बीकानेर को ज्ञापन सौंपा है। किसानों की साफ मांग है कि इस बार पानी की आपूर्ति फव्वारों के बजाय खुले नाले (स्वगले) से की जाए, ताकि समय पर रबी की फसलें सिंचित हो सकें और मेहनत बेकार न जाए। किसानों का कहना है कि फिलहाल रबी की फसलों की बुवाई का अहम समय चल रहा है। अधिकांश किसान अपने खेतों में गेहूं, चना, सरसों जैसी फसलें बो चुके हैं और अब उन्हें समय पर सिंचाई की अत्यंत आवश्यकता है। मगर विभाग की ओर से फव्वारों से पानी देने की नई व्यवस्था ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।
फव्वारे जाम और डिग्गियां क्षतिग्रस्त-किसानों का कहना है कि फव्वारों के पाइप रेत से पूरी तरह भर चुके हैं और लंबे समय से उनकी सफाई या मरम्मत नहीं की गई। कई जगह फव्वारे पूरी तरह जाम और बेकार पड़े हैं। वहीं अधिकांश डिग्गियां टूटी-फूटी और रिसावग्रस्त हैं, जिससे पानी लगातार व्यर्थ जा रहा है। किसानों ने स्पष्ट कहा कि “इन हालात में फव्वारों से पानी देना सिर्फ कागज़ी व्यवस्था है, ज़मीन पर इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा।”
“फव्वारों से नहीं, स्वगले से ही मिले पानी”- ज्ञापन में किसानों ने कहा है कि विभाग को चाहिए कि पानी की आपूर्ति परंपरागत खुले नालों (खलीनालियों) से की जाए, ताकि पानी खेतों तक समान रूप से पहुंचे और रिसाव का खतरा कम हो। किसान यह भी मानते हैं कि फव्वारा व्यवस्था प्रयोग के रूप में भले शुरू की गई हो, लेकिन इसने किसानों की समस्याएं और बढ़ा दी हैं।
“मुआवजा नहीं, डिग्गियां बेकार”- किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि जिन खेतों में डिग्गियां बनाई गई थीं, उनके लिए अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया। उलटे कई जगहों पर खेतों की उपजाऊ भूमि डिग्गियों के कारण बेकार हो गई है। वहीं टूटी पाइपलाइनों से पानी का भारी नुकसान हो रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में सिंचाई असंतुलित हो चुकी है।
“अगर विभाग नहीं चेता तो होगा आंदोलन”- किसानों ने विभाग को चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि अगर पानी की आपूर्ति खुले नाले से शुरू नहीं की गई तो किसानों की फसलें सूख जाएंगी और वे आंदोलन करने को भी मजबूर होंगे। ग्राम डाईया, जसरा, डाईमा सहित पूरे क्षेत्र के किसानों — पप्पूराम, तुलसीराम सहित कई अन्य ने कहा कि विभाग को किसानों की जमीनी सच्चाई समझनी होगी, न कि कागज़ी योजनाओं पर चलना होगा।
ऊंची चकों की लेवलिंग की मांग- ज्ञापन में किसानों ने यह भी कहा कि शोभासर माइनर क्षेत्र में आने वाली ऊंची चकों की प्लान लेवलिंग (प्लान पैगाडग) तत्काल करवाई जाए, ताकि पानी का प्रवाह सभी खेतों तक समान रूप से हो सके और कोई क्षेत्र सिंचाई से वंचित न रह जाए।
“फव्वारा योजना किसानों की फसल बर्बाद करेगी”- किसानों ने साफ कहा कि यह योजना यदि लागू की गई तो यह फसल बर्बादी का कारण बनेगी। “हम फसल बो चुके हैं, अब पानी नहीं मिला तो पूरी मेहनत मिट्टी में मिल जाएगी,” किसानों ने कहा।