मुंबई । महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह 17 सितंबर को मराठवाड़ा मुक्ति दिवस से पहले हैदराबाद राजपत्र के प्रावधानों के तहत मराठा समुदाय कुनबी जाति को प्रमाण पत्र जारी करना शुरू करे।
पाटिल ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती है, तो समुदाय फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा। उन्होंने हाल ही में मुंबई में अपनी भूख हड़ताल समाप्त करते हुए कहा कि सरकार ने मराठा प्रदर्शनकारियों की आठ में से छह माँगें मान ली हैं, जिनमें हैदराबाद राजपत्र को लागू करना भी शामिल है। एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया था, और अब श्री पाटिल ने सरकार से कुनबी प्रमाण पत्र तुरंत जारी करने की मांग की है।
ओबीसी नेताओं ने हालांकि पाटिल का विरोध किया है और महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल द्वारा कुछ दिनों में बॉम्बे उच्च न्यायालय में इस आदेश को चुनौती देने की उम्मीद है।इसके जवाब में श्री पाटिल ने कहा, “मराठा समुदाय को आरक्षण देने के सरकार के फैसले ने हमारे विरोधियों को झकझोर दिया है। समाज को धैर्य रखना चाहिए। जीत और हार, दोनों को स्वीकार करना होगा।”
पाटिल ने ज़ोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और कैबिनेट उपसमिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल पहले ही सार्वजनिक रूप से राजपत्र के कार्यान्वयन की पुष्टि कर चुके हैं। उन्होंने कहा, “उन्हें अब बिना किसी देरी के अपने आदेश का क्रियान्वयन शुरू करना चाहिए। अन्यथा हम दशहरा रैली के दौरान फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।”
भुजबल को कड़ा संदेश देते हुए श्री पाटिल ने कहा, “अगर सरकार सिर्फ़ भुजबल के विरोध के कारण हैदराबाद राजपत्र के आदेश में बदलाव करती है, तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। आदेश में मामूली बदलाव स्वीकार्य हो सकते हैं लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि हमें कुनबी प्रमाणपत्र मिले। अगर कोई इस आदेश को चुनौती देता है तो हम भी 1994 के सरकारी फैसले को चुनौती देंगे।”